सोमवार, 31 मार्च 2014

मेहमान पक्षी

ममता सुराणा 
लेखिका

दूर सुदूर लम्बी यात्रा पर निकला करते पक्षी गण
नीले अम्बर को मापा करते उडकर पंख फैला क्षण क्षण
उनकी मनभावन सुंदरता देख नयन ठगे से रह जाते
कितना मनमोहक रूप सजाती प्रकृति सोच सोचकर कह जाते
ईश्वर सदा सुरक्षित रखना सुंदर सुंदरतम कृतियों को
मानव मैत्री भाव बढाए मिटाकर सब विकृतियों को।
हर जीव जीना चाहता है मौत किसे है प्यारी?
स्वयं समान हर आत्मा है क्यों चलती क्रूर कटारी?
निज पालन पोषण हेतु शाकाहार प्रकृति का सर्वश्रेष्ठ उपहार
उदार ह्दय से क्यों नहीं करता मानव यह कथन स्वीकार?
मांसाहार का त्याग करें बचें असंख्य बीमारी से
मानव में मानवता पनपे सब मुक्त बनें लाचारी से
मेहमान को भगवान है माना इसी देश महान ने
पुष्ट करें हम इन भावों को अपने कर्मादान से
प्राणी प्राणी संग मैत्री बढे नवयुग नूतन इतिहास गढे
दूर देश से आए पक्षी मेहमान हमारी जान बनें
मेहमानों को हम सेवा दें उचित आदर सम्मान दें
जान नहीं लेनी है उनकी यह तो पक्का ठान लें
गौरवशाली परम्परा की विश्व में पहचान बनें
यायावर भागवान हमारे यही छवि जग में उभरे
अहंकार और क्रूर भावना दिल से मिट जाए सबके
अहिंसा मैत्री भावना प्रबल बने मन में अबसे
शाकाहार सही विकल्प है जीव दया दर्शाने का
हृष्ट पुष्ट उससे हो जाते क्यों करता मन नॉनवेज खाने का
परींदो को भी प्यारे प्राण जितने मानव को अपने
मस्त उडानों को भरने दो नन्ही आंखों में सपने
क्यों स्वाद लोलुप दृष्टि लोलुप वृत्ति को प्रश्रय मिले
जीव दया करूणा ममता से क्यों न ह्दय का कमल खिले?
सबसे अपील है हाथ जोडकर मांसाहर का त्याग करें
यात्री बन जो पंक्षी आते सहर्ष उन्हें आजाद करें
उन्हें निहारें आनन्दित होकर अभयारण्य निर्माण करें
स्वदेश की सुदृढ संस्कृति का तहे दिल से सम्मान करें
साईबेरिया आदि अनेक देशों से पक्षी आते करने भ्रमण
क्यों उनकी हत्या की जाती? क्यों होता उनपर आक्रमण ?
तारीफ करें उनके दिमाग की जहां से आते वहीं पर जाते हैं
इन्सान भला क्यों दुष्कर्मों से इन्सानियत गंवाते हैं?
एक गुजारिश एक अर्ज है मत छीनों प्रकृति का प्यार?
सपन सलोना जीवन सुंदर मिलता कभी कभी उपहार।।

राष्ट्र भाषा हिन्दी

ममता सुराणा 
लेखिका  

हम सब भारतवासी करते नाज हमारी भाषा पर।
हिन्दी मातृभाषा है गर्व करें इस बात पर।।
हिन्दी पर बिन्दी लगी हुई है आज कल के दौर में ।
बच्चे सारे पढ रहे हैं कन्वेंट में अंग्रेजी के शोर में।।
सारी भाषाओं का ज्ञान हो बात बडी है उत्तम।
मातृभाषा रहे मगर सर्वदा निकटतम।।
हिन्दुस्तान का मान बढाना है
हिन्दी को अपनाना है
हिन्दी भाषी क्यों शरमामाएं
अंग्रेजी से हम क्या पाएं?
 गर्व करें अपनी भाषा पर
लिखें पढें हिन्दी के अनुश्वर।
संस्कृत हिन्दी का विकास हो. घर घर इसका अभ्यास हो
हिन्दी दिवस एक दिन क्यों साल में
प्रति दिन बोलें हर हाल में
मीठी मधुर जुबां है हिन्दी
मत लगने दो इस पर बिन्दी।

रविवार, 15 सितंबर 2013

हिन्दी हमारी मातृभाषा

Hindi Blogs, Best Indian Blog 

हिन्दी दिवस विशेषांक: क्यों राष्ट्रभाषा नहीं बन पा रही है हिंदी !!


Hindi Diwas in India
हर वर्ष 14 सितंबर को देश में हिन्दी दिवस मनाया जाता है. यह मात्र एक दिन नहीं बल्कि यह है अपनी मातृभाषा को सम्मान दिलाने का दिन. उस भाषा को सम्मान दिलाने का जिसे लगभग तीन चौथाई हिन्दुस्तान समझता है, जिस भाषा ने देश को स्वतंत्रता दिलाने में अहम भूमिका निभाई. उस हिन्दी भाषा के नाम यह दिन समर्पित है जिस हिन्दी ने हमें एक-दूसरे से जुड़ने का साधन प्रदान किया. लेकिन क्या हिन्दी मर चुकी है या यह इतने खतरे में है कि हमें इसके लिए एक विशेष दिन समर्पित करना पड़ रहा है?

Hindi DiwasWhy is Hindi Diwas Celebrated
आज “हिन्दी दिवस” जैसा दिन मात्र एक औपचारिकता बन कर रह गया है. लगता है जैसे लोग गुम हो चुकी अपनी मातृभाषा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं वरना क्या कभी आपने चीनी दिवस या फ्रेंच दिवस या अंग्रेजी दिवस के बारे में सुना है. हिन्दी दिवस मनाने का अर्थ है गुम हो रही हिन्दी को बचाने के लिए एक प्रयास.

Hindi: Language of India
हिन्दी हमारी मातृभाषा है. जब बच्चा पैदा होता है तो वह पेट से ही भाषा सीख कर नहीं आता. भाषा का पहला ज्ञान उसे आसपास सुनाई देनी वाली आवाजों से प्राप्त होता है और भारत में अधिकतर घरों में बोलचाल की भाषा हिन्दी ही है. ऐसे में भारतीय बच्चे हिन्दी को आसानी से समझ लेते हैं.

उस छोटे बच्चे को सभी घर में तो हिन्दी में बात करके समझाते और सिखाते हैं लेकिन जैसे ही वह तीन या चार साल का होता है उसे प्ले स्कूल या नर्सरी में भेज दिया जाता है और यहीं से शुरू होती है अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई. बचपन से हिन्दी सुनने वाले बच्चे के कोमल दिमाग पर अंग्रेजी भाषा सीखने का दबाव डाला जाता है. पहली और दूसरी कक्षा तक आते-आते तो कई स्कूलों में शिक्षकगण बच्चे को समझाने के लिए भी अंग्रेजी भाषा का ही इस्तेमाल करते हैं. अंग्रेजी को स्कूलों में इस तरह पढ़ाया जाता है जैसे यह हमारी राष्ट्रभाषा हो और यही हमें दाना-पानी देगी.

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अंग्रेजी बने बॉस, हिन्दी झेले गरीबी
वहीं दूसरी ओर जिन बच्चों को अंग्रेजी सीखने में दिक्कत आती है और वह इसमें कमजोर रह जाते हैं उन्हें गंवार समझा जाता है. हालात तो यह है कि आज कॉरपोरेट और व्यापार श्रेणी में लोग हिन्दी बोलने वाले को गंवार समझते हैं. एक कंप्यूटर प्रोग्रामर को चाहे कितनी ही अच्छी कोडिंग और प्रोग्रामिंग आती हो लेकिन अगर उसकी अंग्रेजी सही नहीं है तो उसे दोयम दर्जे का माना जाता है.

हिन्दी की हालत
आज देश में हिन्दी के हजारों न्यूज चैनल और अखबार आते हैं लेकिन जब बात प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान की होती है तो उनमें अव्वल दर्जे पर अंग्रेजी चैनलों को रखा जाता है. बच्चों को अंग्रेजी का विशेष ज्ञान दिलाने के लिए अंग्रेजी अखबारों को स्कूलों में बंटवाया जाता है लेकिन क्या आपने कभी हिन्दी अखबारों को स्कूलों में बंटते हुए देखा है.

आज जब युवा पढ़ाई पूरी करके इंटरव्यू में जाते हैं तो अकसर उनसे एक ही सवाल किया जाता है कि क्या आपको अंग्रेजी आती है? बहुत कम जगह हैं जहां लोग हिन्दी के ज्ञान की बात करते हैं.

बात सिर्फ शैक्षिक संस्थानों तक सीमित नहीं है. जानकारों की नजर में हिन्दी की बर्बादी में सबसे अहम रोल हमारी संसद का है. भारत आजाद हुआ तब हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने की आवाजें उठी लेकिन इसे यह दर्जा नहीं दिया गया बल्कि इसे मात्र राजभाषा बना दिया गया. राजभाषा अधिनियिम की धारा 3 [3] के तहत यह कहा गया कि सभी सरकारी दस्तावेज और निर्णय अंग्रेजी में लिखे जाएंगे और साथ ही उन्हें हिन्दी में अनुवादित कर दिया जाएगा. जबकि होना यह चाहिए था कि सभी सरकारी आदेश और कानून हिन्दी में ही लिखे जाने चाहिए थे और जरूरत होती तो उन्हें अंग्रेजी में बदला जाता.

सरकार को यह समझने की जरूरत है हिन्दी भाषा सबको आपस में जोड़ने वाली भाषा है तथा इसका प्रयोग करना हमारा संवैधानिक एवं नैतिक दायित्व भी है. अगर आज हमने हिन्दी को उपेक्षित करना शुरू किया तो कहीं एक दिन ऐसा ना हो कि इसका वजूद ही खत्म हो जाए. समाज में इस बदलाव की जरूरत सर्वप्रथम स्कूलों और शैक्षिक संस्थानों से होनी चाहिए. साथ ही देश की संसद को भी मात्र हिन्दी पखवाड़े में मातृभाषा का सम्मान नहीं बल्कि हर दिन इसे ही व्यवहारिक और कार्यालय की भाषा बनानी चाहिए.

मंगलवार, 13 अगस्त 2013

आगस्टा वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में भारी धांधली

http://hindi.webdunia.com/news-national

नई दिल्ली। विवादास्पद 3727 करोड रुपए वाले आगस्टा वेस्टलैंड सौदे की आज नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने कटु आलोचना करते हुए कहा कि इसमें भारी धांधली हुई है। कैग ने पाया कि 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की खरीद में कई मौकों पर नियमों से हटकर फैसले किए गए और परियोजना की मूल मंजूरी से हटकर खरीद की आवश्यकताओं में पांच बार बदलाव किए गए।

भारत विभाजन के 10 बड़े कारण

सोचना होगा  क्या यह ठीक कह रहे हैं ?

http://hindi.webdunia.com/news-independence-day/

विभाजन किसी देश की भूमि का ही नहीं होता, विभाजन लोगों  की भावनाओं का भी होता है। विभाजन का दर्द वो ही अच्छी तरह जानते हैं, जिन्होंने प्रत्यक्ष रूप से इसको सहा है। बंटवारे के दौरान ‍जिन्हें अपना घर-बार छोड़ना पड़ा, अपनों को खोना पड़ा...यह दर्द आज भी उन्हें सालता रहता है। भारत-पाकिस्तान, उत्तर- 'दक्षिण कोरिया और जर्मनी का विभाजन आम लोगों के लिए काफी त्रासदीपूर्ण रहा।

सोचना होगा क्या यह ठीक कह रहे हैं ?

बेईमानी तो रॉबर्ट वाड्रा का विशेषाधिकार है क्‍योंकि वो सोनिया के दामाद हैं: आजम खान

 

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के कथित अवैध भूमि सौदे मामले में मंगलवार को तीखा हमला करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) नेता एंव कैबिनेट मंत्री आजम खान ने कहा कि सोनिया के दामाद को बेईमानी और लूट करने का विशेषाधिकार है.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के कथित अवैध भूमि सौदे मामले में मंगलवार को तीखा हमला करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) नेता एंव कैबिनेट मंत्री आजम खान ने कहा कि सोनिया के दामाद को बेईमानी और लूट करने का विशेषाधिकार है.
और भी... http://aajtak.intoday.in/story/vadra-deals-azam-takes-a-dig-at-sonia-1-739053.html

सोचना होगा क्या यह ठीक कह रहे हैं?

RJD नेता ने की मोदी की तारीफ, कहा- मोदी सबसे लोकप्रिय नेता

बिहार विधान परिषद में आरजेडी सदस्य नवल किशोर यादव ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें वर्तमान में देश का सबसे अधिक लोकप्रिय नेता बताते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री बनने की क्षमता रखते हैं.

यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए मोदी को वर्तमान में देश का सबसे अधिक लोकप्रिय नेता बताया और कहा कि लोकतंत्र बोली से चलती है गोली से नहीं और वे बोली के जरिए आम आदमी की आवाज उठा रहे हैं.